भारत में बुद्ध पूर्णिमा का उत्सव 7 मई को है। भगवान बुध का जन्म 563 ईसा पूर्व नेपाल के लुम्बिनी नगर में वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। भगवान बुद्ध का दर्शन बेहद ही सरल और उच्च कोटि का है, जिसे मध्यम मार्ग के नाम से जाना जाता है। भगवान बुद्ध के दर्शन पर आधारित एक जीवन पद्धति है जिसे हम बौद्ध धर्मे के नाम से जानते हैं। बुद्ध के मूल सिद्धांतों में चार प्रमुख बातें हैं, जो इस प्रकार है:
दुख का सत्य
दुख की उत्पत्ति का सच
दुख की समाप्ति का सत्य
दुख को समाप्ति के मार्ग का सत्य
 अर्थात, भगवान बुद्ध मानते हैं कि जीवन दुखों का भंडार है और जीवन के प्रत्येक पक्षों में दुख समाहित है। वे दुख का मूल कारण इच्छा को मानते हैं। इच्छा ही व्यक्ति को भौतिक जीवन से बांधे रखती है। अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा को मार ले तो वह मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। भगवान बुध कहते हैं कि इच्छा को त्यागकर व्यक्ति अष्ठ सूत्रीय मार्ग से प्राप्त किया जा सकता है।

बुद्ध के आठ सूत्रीय मार्ग
दयालुता, पूर्ण, सत्यवादी और उचित संभाषण
निष्कपट, शांतिपूर्ण और उचित कर्म
उचित आजीविका की खोज, जिससे किसी को हानि न हो
उचित प्रयास और आत्म-नियंत्रण
उचित मानसिक चेतना
उचित ध्यान और जीवन के अर्थ पर ध्यान केन्द्रित करना
निष्ठावान और बुद्धिमान व्यक्ति का मूल्य उसके उचित विचारों से है
अंधविश्वास से बचना चाहिए और सही समझ विकसित करना चाहिए
 भगवान बुद्ध के अनुसार, उनका दिखाया गया मध्यम मार्ग इन आठ सूत्रीय मार्ग की व्याख्या करता है, जो व्यक्ति को मोक्ष की ओर ले जाता है। भगवान बुद्ध वेदों की प्रमाणिकता को नकारते हैं। भगवान के महापरिनिर्वाण के बाद उनके दर्शन को संकलित करने के लिए 500 वर्षों तक बौद्ध धर्म की चार बौध संगति आयोजित की गई थीं। इसके फलस्वरूप त्रि-पटकों का लेखन हुआ - विनय, सुत्त और अभिधम्म। ये त्रिपट पाली भाषा में लिखे गए हैं।